मुझे जीने दो।
बेटी- आखिर क्या है इस शादी की वजह , क्यों मेरी शादी भाई से पहले करना चाहते हो आप लोग , ये तो दिन भर बाईक पर घूमता रहता है मैं तो अभी पढ रही हू।
पिता - बेटी तुम समझोगी नहीं जब माँ बनोगी तब जान जाओगी हमारी परेशानी ।
शायद इतना ही काफी है , एक बेटी और उनके माता-पिता की परेशानी को समझने के
लिए । आज भी हमारे समाज मे लड़की अपने घर वालो पर एक स्वाभाविक बोझ ही मानी जाती है , कई घरो मे ये भेदभाव से संबंधित नहीं है लेकिन ये सामाज मेँ चलीं आ रहीं एक प्रथा है । यहाँ किसी भी पक्ष को निज़ी स्तर पर गतल नहीं ठहराया जा सकता पर व्यक्ति की स्वतंत्रता पर ऐसे रोक लगाना कहा तक जायज़ है ।
दरअसल यहाँ एक समाज का दबाव काम कर रहा है एक ऐसा हिंसक सामाजिक दबाव जो पिता को हर सामाजिक कार्यक्रम मे यह सुनने पर बेबस करता है कि अब तो बेटी की शादी करवा दो , जो माँ के कानों तक उन बातों को पहुचाता है जिसे वह अपने बच्चों के लिए कभी नहीं सुनना चाहती । लड़की इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ है कि बिना नौकरी उसकी स्थिति बिलकुल अपनी माॅ की तरह होगी , लेकिन नौकरी करके वह कुछ तो परिवर्तन लाएगी , हाँ यहाँ किसी तरह की क्रांती नहीं होगी बस पैसे कमाने के चलते वो आर्थिक तौर पर मज़बूत होगी और अपने वजूद को पहचान पाएगी ।
ऊपर लिखी ये बाते किसी कहानी की तरह लगती है लेकिन है नहीं , यह उन हजारों लड़कियों की कहानी जो रोज इसी प्रकार कि दुविधा का सामना करती है जिनमें से कुछ को आप भी जानते होंगे । ये लडकियाँ दो तरफ से दबाव मे होती है पहला तो परिवार का और दूसरा शिक्षा , हम इन्हें शिक्षा एवं अन्य कारण से तो मुक्ति नहीं दिला सकते लेकिन इनका पारिवारिक बोझ अवश्य कम कर सकते है क्योंकि यह संभव है कि इनमें से कोई आपकी बहन या परिचित हो।
लिए । आज भी हमारे समाज मे लड़की अपने घर वालो पर एक स्वाभाविक बोझ ही मानी जाती है , कई घरो मे ये भेदभाव से संबंधित नहीं है लेकिन ये सामाज मेँ चलीं आ रहीं एक प्रथा है । यहाँ किसी भी पक्ष को निज़ी स्तर पर गतल नहीं ठहराया जा सकता पर व्यक्ति की स्वतंत्रता पर ऐसे रोक लगाना कहा तक जायज़ है ।
दरअसल यहाँ एक समाज का दबाव काम कर रहा है एक ऐसा हिंसक सामाजिक दबाव जो पिता को हर सामाजिक कार्यक्रम मे यह सुनने पर बेबस करता है कि अब तो बेटी की शादी करवा दो , जो माँ के कानों तक उन बातों को पहुचाता है जिसे वह अपने बच्चों के लिए कभी नहीं सुनना चाहती । लड़की इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ है कि बिना नौकरी उसकी स्थिति बिलकुल अपनी माॅ की तरह होगी , लेकिन नौकरी करके वह कुछ तो परिवर्तन लाएगी , हाँ यहाँ किसी तरह की क्रांती नहीं होगी बस पैसे कमाने के चलते वो आर्थिक तौर पर मज़बूत होगी और अपने वजूद को पहचान पाएगी ।
ऊपर लिखी ये बाते किसी कहानी की तरह लगती है लेकिन है नहीं , यह उन हजारों लड़कियों की कहानी जो रोज इसी प्रकार कि दुविधा का सामना करती है जिनमें से कुछ को आप भी जानते होंगे । ये लडकियाँ दो तरफ से दबाव मे होती है पहला तो परिवार का और दूसरा शिक्षा , हम इन्हें शिक्षा एवं अन्य कारण से तो मुक्ति नहीं दिला सकते लेकिन इनका पारिवारिक बोझ अवश्य कम कर सकते है क्योंकि यह संभव है कि इनमें से कोई आपकी बहन या परिचित हो।
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