Saturday, 16 August 2014

कितने मजबूत है आपके रिश्ते ।

क्या देह की आग इतनी भयंकर हो सकती है कि जो रिश्तों को ताक पर रख दे ? और उससे भी आगे बढकर बच्चों के शोषण से भी पीछे न हटे। 
हमारे वातावरण  मे कुछ ऐसी प्रवृत्ति के लोग रह रहे है जो अपनी हवस को बुझाने के लिए कई बच्चों की उम्मीद और हौसलो के दिये को सदैव के लिए बुझा देते है , और भर देते है उनमे कुंठा , घुटन और ग्लानी ।
नज़दीकी रिश्तों मे अगर कोई लडका जब  किसी लडकी से उम्र मे 12-15 साल बडा हो और लडकी को प्रेम जाल मे फसाकर उसका यौन शोषण करता हो तो क्या माना जाए इसे । आश्चर्य तो तब होता है जब वो यौनिकता को सार्वजनिक करके लडकी का मजाक बनाता है ।
लेकिन बाल शोषण मात्र यहीं तक सीमित नहीं कई बार देखने मे आता है कि ऐसे लोग जो बच्चे के बहुत नजदीकी है या परिवार मे आते जाते रहते है भी इस घिनौने  अपराध को अंजाम देते है ।
ये बच्चों को डराकर या बदनामी का डर दिखाकर निरंतर उनका शोषण करते है ।
यह बात स्पष्ट है कि इस घिनौने कृत्य पर अंकुश सामाजिक दबाव से ही लग सकता है , अगर ऐसा कोई आपकी नजर मे हो तो इसकी अनदेखी न करें क्योंकि कोई शोषित बच्चा आपका अपना भी हो सकता है ।
याद रखे अत्याचार करने वाले से सहने वाला ज्यादा दोषी होता है , और किसी ऐसे व्यक्ति पर अत्याचार हो रहा हो जो इसका मतलब भी नहीं समझता हो तो उस पर यह अत्याचार होते देखना हमे भी दोषी के वर्ग मे खड़ा करता है ।

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