इसे पति की श्रेष्ठता कहो,
या नारी की भक्ति,
या कहो इसे सांस्कृतिक अभिव्यक्ति,
कि जब से हम पैदा हुए हैं,
पत्नी ने ही पति के पैर छुए है |
ऐसा नहीं कि पति के पैर संगेमरमर है,
पर शायद अच्छी संस्कृति का कुछ अंश जर्जर है |
घूँघट, मंगलसूत्र माथे पर सिंदूर पोते गये,
कितने संयम, कितने रीति पत्नियों पर थोपे गये |
उनके स्नेह, करूणा, त्याग ने,
रीतियों को फ़सा लिया,
पत्नियों ने इन्हे,
शृंगार का रूप बना लिया |
भारी शिकायतों को संस्कृति के,
तराज़ू में तोल्ती हैं,
सिर्फ़ हल्की शिकायतें हीं ये पत्नियाँ,
बोलती हैं |
"काश, अगर, क्यों नहीं"- भारी शिकायतों में है,
इन्हे नहीं बोलना- संस्कृति की हिदायतों में है |
कौन कहता है कि संस्कृति बदल दो,
किंतु पतियों की मानसिकता में ज़रा दख़ल दो |
ये दखलअंदाज़ी ज़रा आराम से, प्यार से हो,
पत्नियों द्वारा ही प्रेम के तार से हो |
या नारी की भक्ति,
या कहो इसे सांस्कृतिक अभिव्यक्ति,
कि जब से हम पैदा हुए हैं,
पत्नी ने ही पति के पैर छुए है |
ऐसा नहीं कि पति के पैर संगेमरमर है,
पर शायद अच्छी संस्कृति का कुछ अंश जर्जर है |
घूँघट, मंगलसूत्र माथे पर सिंदूर पोते गये,
कितने संयम, कितने रीति पत्नियों पर थोपे गये |
उनके स्नेह, करूणा, त्याग ने,
रीतियों को फ़सा लिया,
पत्नियों ने इन्हे,
शृंगार का रूप बना लिया |
भारी शिकायतों को संस्कृति के,
तराज़ू में तोल्ती हैं,
सिर्फ़ हल्की शिकायतें हीं ये पत्नियाँ,
बोलती हैं |
"काश, अगर, क्यों नहीं"- भारी शिकायतों में है,
इन्हे नहीं बोलना- संस्कृति की हिदायतों में है |
कौन कहता है कि संस्कृति बदल दो,
किंतु पतियों की मानसिकता में ज़रा दख़ल दो |
ये दखलअंदाज़ी ज़रा आराम से, प्यार से हो,
पत्नियों द्वारा ही प्रेम के तार से हो |
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