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Friday, 15 August 2014

Naari

इसे पति की श्रेष्ठता कहो,
या नारी की भक्ति,
या कहो इसे सांस्कृतिक अभिव्यक्ति,
कि जब से हम पैदा हुए हैं,
पत्नी ने ही पति के पैर छुए है |
ऐसा नहीं कि पति के पैर संगेमरमर है,
पर शायद अच्छी संस्कृति का कुछ अंश जर्जर है |
घूँघट, मंगलसूत्र माथे पर सिंदूर पोते गये,
कितने संयम, कितने रीति पत्नियों पर थोपे गये |
उनके स्नेह, करूणा, त्याग ने,
रीतियों को फ़सा लिया,
पत्नियों ने इन्हे,
शृंगार का रूप बना लिया |
भारी शिकायतों को संस्कृति के,
तराज़ू में तोल्ती हैं,
सिर्फ़ हल्की शिकायतें हीं ये पत्नियाँ,
बोलती हैं |
"काश, अगर, क्यों नहीं"- भारी शिकायतों में है,
इन्हे नहीं बोलना- संस्कृति की हिदायतों में है |
कौन कहता है कि संस्कृति बदल दो,
किंतु पतियों की मानसिकता में ज़रा दख़ल दो |
ये दखलअंदाज़ी ज़रा आराम से, प्यार से हो,
पत्नियों द्वारा ही प्रेम के तार से हो |