" खुली जब आँख तुझे देखा
ऊँगली पकड़ के चलना सीखा
सीखी तुझसे दुनिया दारी
माँ तू है जग से प्यारी "
माँ एक ऐसा शब्द जिसमे सारी दुनिया समाई है और जिनके पास माँ होती है उनसे ज्यादा खुशनसीब कोई नहीं होता । कभी कभी अनजाने में मैं माँ को बहुत हर्ट कर देती हूँ जिसका मुझे एहसास बाद में होता है इसीलिए मै आज वो लिखने जा रही हूँ जो मैं महसूस तो करती हूँ पर कभी कह नहीं पाती और शायद अपनी माँ से कभी कह भी नहीं पाउंगी। माँ वो है जो हमेशा से हमे एक बेहतर जिंदगी देने कि कोशिश करती है । माँ को चाहे कितनी भी तकलीफ हूँ पर वो मुझे कभी इस बात का एहसास तक नहीं होने देती है। याद आते है वो पल जब में छोटी थी और मेरे एक्साम्स होते थे। एक्साम्स होते तो मेरे थे पर चिंता उन्हें रहती थी ऑफिस से आने के बाद सीधे उनका मुझे पढ़ाने बैठ जाना और रात में मुझे टाइम पर सुला देना। और सुबह होते ही छत पर ले जा के मुझे पढ़ाना । पर शायद अब वो बात नहीं रह गई है ना जाने क्यों हम बदल जाते है किसी और के करीब आने से , ना जाने क्यों मुझे अपने ही मेरे दुश्मन लगने लगते है ना जाने क्यों ??? अब हर चीज़ गलत लगने लगती है यहाँ तक मम्मी का करीब रहना भी उनका कोई सवाल करना भी मुझे बुरा लगता है एक चिड़चिड़ाहट सी होने लगती है ना जाने क्यों ??
समझ नहीं आता क्यों भूल जाते है हम अपने पुराने रिश्तों को जो हमारे सबसे ख़ास होते है , उन्ही से दूर होने लगते है किसी और के लिए हम अनजाने में उन्हें दुखी कर देते है जिन्होंने हमारे लिए ना जाने कितने दुःख सहे होंगे।
" दर्द दिए तुझे एहसास है मुझे
आंखों से बहते आसूं भी याद है मुझे
कर दी गलती कैसे मांगू माफ़ी
मुझको तेरी जरुरत आज भी है "