Monday, 18 April 2016

अफ़सोस

कभी -कभी कुछ घटनाएँ इतने विपरीत समय मे घटित होती है कि उनका अफसोस मनाने तक का समय इंसान के पास नहीं होता , वो हर रात जलता है कुढता है और अपने गम को अपने जीवन का अभिन्न अंग मान बैठता है उसके लिए हर रात इतनी काली और उदासीन होती है कि वह हर पल सुबह होने का इंतज़ार करता है ।
उस असहाय व्यक्ति की पीढा का आलम यह होता है कि वह खुद से ही विद्रोह कर बैठता है, अशांत मन उसे जीने नहीं देता । कहते है कि वक्त हर ज़ख्म को भुला देता है लेकिन ऐसे ज़ख्म वक्त के साथ नासूर मे तब्दील हो जाते है ।और ये नासूर पूरी उम्र दुख रूपी मवाद के रूप रिसते रहते है ।

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