Monday, 18 April 2016

मित्र वही जो मुसीबत में काम आए

कुछ रिश्ते कभी भी शब्दों मे नहीं बाँधे जा सकते उन्हीं मे से एक है मित्रता , हम हर रिश्ते से मित्रता को जोड़ सकते है और जैसे ही मित्रता उस अमूक रिश्ते से जुडती है वह रिश्ता और भी मज़बूत हो जाता है ,और सबसे बड़ी बात यह कि हम हर परिचित व्यक्ति को एक साधारण शब्द मित्र से संबोधित कर सकते है , ईश्वर ने हमे नातेदारी जन्म से दी है लेकिन मित्रों का चयन हमारे विवेक पर छोडा है और सही मायनों मे यह ही मनुष्य की सबसे बड़ी स्वतंत्रता है ।
लेकिन यह भी याद रखे कि मित्रता ही व्यक्ति को सर्वाधिक नुकसान पहुँचाती है , तो ऐसे परिचितो की पहचान करे और मित्रता को बदनाम होने से बचाए क्योंकि वास्तविकता यही है कि हर परिचित मित्र नही होता , और मित्र वहीं है जो मुसीबत मे काम आए ।

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