Sunday, 17 April 2016

आधुनिक Love

दोनों का मिलना बिलकुल सहज था , कई दिनों तक दोनों एक दूसरे पर नज़र रखे हुए थे और अपने मन की बात एक दूसरे से कहना चाहते थे , आखिर वह दिन भी आया जब इश्क का इज़हार हुआ । आने वाले कई दिनो तक दोनों ने एक- दूसरे को जानने के लिए कई राते फोन पर बिताई, दोनों के मित्रों को इस बात से पीढा पहुँची कि अमुक व्यक्ति हमारे लिए समय नहीं निकाल रहा है ।
एक दिन दोनों रेस्तराँ में डिनर के लिए पहुँचे मिलन के नशे मे चूर दोनों की ऑखो से प्रेम झलक रहा था खाना तो मात्र बहाना था दरअसल दोनों सिर्फ एक दूसरे का साथ चाहते थे । तभी लड़के ने उनके भविष्य को लेकर कुछ गंभीर प्रशन उठाएँ , हम शादी कब करेंगे ? लड़की मौन रही गहरी साँस लेकर बोली -  मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ लेकिन मैं शादी अपने माता पिता की मर्जी से ही करूँगी ।लड़का शांत भाव से उसे निहारता रहा फिर एका एक बोला ठीक है तुम्हारी जैसी मर्जी , लड़के ने अपने अभिनय का बेहतरीन प्रदर्शन किया वह इस बात को अपनी चेहरे की गंभीरता से छिपने मे कामयाब हुआ कि वह भी यहीं चाहता था ।
आखिरकार दोनों के सब्र का बांध टूट गया और सारी मर्यादा को भूलकर दोनों एक हो गए, उन्होंने कई राते एक साथ गुजारी और कुछ दिनों बाद एक साथ ही रहने लगे , शुरुआत मे दोनों को लगा कि उनका फैसला सही था लेकिन उनमें वहीं समस्या पैदा होने लगी जो आम दंपति मे होती है बस फर्क यह था कि इस छिपे रिश्ते को सामाजिक मान्यता नहीं थी ।
कुछ समय बाद दोनों का मोह एक दूसरे से भंग होने लगा और उन्होंने फैसला किया कि वे दोनों इस रिश्ते से अलग भी संबंध स्थापित करेंगे , दोनों ने अपने -अपने लिए नए साथी तलाश लिए, कभी -कभी तो वे साथ मे डिनर पर भी गए ।आखिर वह समय भी आ गया जब दोनों की पढाई खत्म हो गई और दोनों अपने अपने घर लौट गए । समय के साथ उनका प्रेम मित्रता मे बदल गया और दोनों अपने अपने जीवन मे व्यस्त हो गए ।दोनों की शादी का समय नज़दीक आ गया और वे लगभग अपने भावी हमसफरो से असंतुष्ट रहे , पर ना जाने वह कौन सी बात थी जो उन्हें एक दूसरे से जोडे रखी थी वे अपने -अपने साथियों की तुलना एक दूसरे से करते और अंततः एक दूसरे को ही अपने लिए बेहतर सिद्ध करते ।
कई दिनों तक एक दूसरे को शिद्दत से याद करने के बाद अंततः दोनों ने पारिवारिक मर्जी के इतर शादी कर ली , शायद वे खुश भी हो लेकिन कुछ गलतियाँ उन्हें हमेशा दुख देंगी क्योंकि आज भी लोग कितने ही आधुनिक क्यों ना हो जाए अपने साथी को किसी और के साथ बर्दाश्त नहीं कर पाते ।

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